श्री सिद्धबली बाबा धाम, कोटद्वार — Shri Sidhbali Baba Dham, Kotdwar

Shri Sidhbali Baba — श्री सिद्धबली बाबा
Shri Ram and Hanuman jiHanuman ji

|| जय श्री सिद्ध बाबा ||

तस्य चिन्हं प्रवक्ष्यामि यथा तज्ज्ञायते परम |

कुमुदस्य तथा गन्धो लक्ष्यते मध्यरात्रके ||

  • मन की शांति
  • प्रार्थना
  • विश्वास और भक्ति
  • आध्यात्मिकता

इस तीर्थ में कौमुद (कार्तिक) की पूर्णिमा को चन्द्रमा ने भगवान शंकर को तपकर प्रसन्न किया था इसलिए इस स्थान का नाम कौमुद पढ़ा। शायद कोटद्वार कस्बे को तीर्थ कौमुद द्वार होने के कारण ही कोटद्वार नाम पड़ा। क्योकि प्रचलन के रूप में स्थानीय लोग इस कौमुद द्वार को संक्षिप्त रूप में कौद्वार कहने लगे, जिसे अंग्रेजों के शासनकाल में अंग्रेजों के सही उच्चारण न कर पाने के कारण उनके द्वारा कौदवार कहा जाने लगा।

Arti at Sidhbali Dham
प्रातः आरती
बसंत पंचमी से श्राद्ध पक्ष तक प्रातः 4ः45 बजे एवं शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस से बसंत पंचमी तक प्रातः 5ः15 बजे कपाट खुलते हैं। प्रातः रुद्राष्टाध्यायी पाठ के साथ पिण्डी अभिषेक पर्दे में किया जाता है ( क्योंकि हनुमान जी ब्रह्माचारी है, इसी कारण उनका अभिषेक पर्दे में किया जाता है)। उसके पश्चात पुष्प आदि से बाबा का श्रृंगार किया जाता है। पंचरत्नस्तोत्र के साथ बाबा की आरती की जाती है। श्री गुरू गोरखनाथ जी के धुने में विराजमान साधु द्वारा बनाए गए रोट को प्रथम बार भोग के रूप में बाबा को चढ़ाया जाता है। इसके बाद श्री शनिदेव जी की आरती, माता की आरती, शिवालय की आरती एवं साधु द्वारा धुने की आरती की जाती है। उसके पश्चात प्रातः 7.00 बजे भण्डारा आरम्भ कर दिया जाता है।
Arti at Sidhbali Dham
सांयकालीन आरती
ग्रीष्मकाल में सांयकालीन आरती सांय 6ः45 बजे प्रारम्भ होती है एवं 8ः00 बजे मन्दिर के कपाट बन्द कर दिए जाते हैं।शीतकाल में सांयकालीन आरती सांय 6ः15 बजे प्रारम्भ होती है एवं 7ः30 बजे कपाट बन्द कर दिए जाते हैं।